Friday, July 5, 2013

MIDDLE HEADS KE PASS NAHI H KOI KAAM

पूरे प्रदेश में 5548 मिडिल हेड (मौलिक शिक्षा मुखिया) नियुक्त तो कर दिए गए हैं लेकिन अब वे दुविधा में है कि काम क्या करें। काम के लिए उनके पास कोई दिशा निर्देश ही नहीं हैं। ऐसे में करीब साढ़े तीन हजार स्कूलों में समानांतर प्रशासनिक केंद्र उत्पन्न हो गए हैं। 1हैरानी की बात तो यह है कि सरकार ने इन हजारों मिडिल हेड के लिए न तो अलग से आफिस की व्यवस्था की है और ही अन्य उन जरूरी सुविधाओं की जिनकी जरूरत एक मुखिया को होती है। कक्षा 6 से 8 तक के लिए अलग से हेड बन जाने के बाद कायदे से उनके स्टाफ की
हाजिरी भी अलग रजिस्टर में लगनी चाहिए और उनकी आदेश पुस्तिका भी अलग होनी चाहिए। न साजो-सामान और न दिशा-निर्देश, ऐसे में नवनियुक्त हेड न तो स्वतंत्र कार्य कर पा रहे हैं और न ही पुराने र्ढे पर काम करने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। ऐसे में शिक्षा तो प्रभावित होनी ही है किंतु बच्चों के भविष्य की फिक्र किसी को नहीं है। 1शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तो नवंबर 2012 से ही शुरू हो गया था। मिडिल हेड नियुक्त किए गए सभी मास्टरों की पदोन्नति की चर्चाएं उसी समय से चल रही हैं लेकिन सरकार ने जून 2013 में इनको पदोन्नति दी। इस दौरान उन्होंने इस मानसिकता से काम किया कि हमने तो चले ही जाना है..। जिसका परिणाम दसवीं के खराब परीक्षा परिणाम के रूप में सामने आया। अब जून की छुट्टियों में इन मिडिल हेड ने कार्यभार संभाल लिया किंतु इनके पास करने को कुछ खास नहीं है।

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