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Thursday, July 23, 2026

APAAR ID की अनिवार्यता खत्म

 APAAR ID की अनिवार्यता खत्म 


*पेरेंट्स को मिलेगा हां या ना का विकल्प, देशभर में ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला लागू*


*सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है।*


`भुवनेश्वर के पेरेंट्स ने दायर की याचिका`


भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ पेरेंट्स ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।


`पहले से मना करने का अधिकार भी हो`


APAAR ID को सरकार स्वैच्छिक बता रही है, लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।


`सरकार का फैसला पेरेंट्स के पक्ष में`


केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।


`छात्रों के अधिकार नहीं होंगे प्रभावित`


याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं रखा किया जाना चाहिए।


`APAAR ID 12 अंकों की छात्र पहचान`


अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान (स्टूडेंट आईडी) है।


इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।


`सरकार का दावा - छात्रों के हित में योजना`


सरकार और CBSE का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।


`डाटा लीक होने का खतरा बढ सकता है`


याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डाटा एक जगह इकट्ठा होने से डाटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।


यदि किसी वजह से डाटा का गलत इस्तेमाल होता है तो बच्चों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई पेरेंट्स का कहना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में परेशानी हो सकती है।

Tuesday, July 7, 2026

3rd ACP will Be Given Even having no Eligibility: CWP 5031-2024(O&M)

 इस निर्णय का संक्षिप्त निष्कर्ष निम्नलिखित है:


1. याचिकाएं स्वीकार कर ली गईं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सभी संबंधित रिट याचिकाओं को मंजूर कर दिया। 



2. 3rd ACP देने से इनकार करने का आदेश रद्द। 05.06.2023 का वह आदेश, जिसके द्वारा कर्मचारियों को 3rd ACP से वंचित किया गया था, न्यायालय ने निरस्त कर दिया। 



3. 24 वर्ष की नियमित एवं संतोषजनक सेवा पूरी होने की तिथि से 3rd ACP देने का निर्देश। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को 2016 के हरियाणा ACP नियमों के अनुसार 24 वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने की तिथि से 3rd ACP का लाभ दिया जाए। 



4. शैक्षणिक योग्यता के अभाव में ACP नहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि ACP केवल वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) है, पदोन्नति (Promotion) नहीं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कर्मचारी अगले पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करता, 3rd ACP से वंचित नहीं किया जा सकता।  



5. बकाया राशि 6 सप्ताह में देने का आदेश। न्यायालय ने सभी एरियर एवं अन्य वित्तीय लाभों की गणना कर 6 सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। 




व्यावहारिक प्रभाव


यदि कोई हरियाणा सरकार/स्थानीय निकाय का कर्मचारी केवल इसलिए 3rd ACP से वंचित किया गया है कि उसके पास अगले पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या प्रमोशनल योग्यता नहीं है, तो यह निर्णय उसके पक्ष में एक महत्वपूर्ण मिसाल (precedent) है। ACP को पदोन्नति नहीं बल्कि वित्तीय लाभ माना गया है।

Full Judgement Below












Friday, May 29, 2026

सुप्रीम टेट अनिवार्यता बिग उपडेट समस्त रिव्यू पिटीशन खारिज हुई

 सुप्रीम टेट अनिवार्यता बिग उपडेट ...


समस्त रिव्यू पिटीशन खारिज हुई ✍️


 केवल टेट पास करने की अनिवार्य समय सीमा 02 साल से बढ़ाकर 03 साल हुई ✍️


मतलब 01 सितंबर 2028 तक सभी को टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य ✍️




आज आएगा टेट अनिवार्यता का फैसला

 सुप्रीम कोर्ट टेट अनिवार्यता बिग उपडेट ...


आज आएगा टेट अनिवार्यता का फैसला 💪


पूरे देश भर से दाखिल रिव्यु याचिका पर 13 मई की सुनवाई पर आज आएगा फैसला ✍️ 




CWP No. 29139 -2024 के तहत माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विज्ञापन संख्या 02/2023 के अंतर्गत टीजीटी (ROH & MEWAT CADRE) और 04/2023 के अंतर्गत टीजीटी पंजाबी (ROH) का परिणाम जारी

 CWP No. 29139 -2024 के तहत माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विज्ञापन संख्या 02/2023 के अंतर्गत टीजीटी (ROH & MEWAT CADRE) और 04/2023 के अंतर्गत टीजीटी पंजाबी (ROH) का परिणाम जारी कर दिया गया 






रिजल्ट लिंक :

 (02/2023)

https://hssc.gov.in/file/ac1f23cd-9d9c-1328-819e-6ee6aeec0025/result


04/2023

https://hssc.gov.in/file/ac1f23cd-9d9c-1328-819e-6ee7482a0027/result

Sunday, May 24, 2026

दिनांक 21 मई 2026 का माननीय सुप्रीम कोर्ट का असम के Work Charged एवं Muster Roll कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय

 ⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला कर्मचारियों के पक्ष में ⚖️

दिनांक 21 मई 2026 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने असम के Work Charged एवं Muster Roll कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने एक ही नीति के तहत लगभग 30,000 कर्मचारियों को नियमित कर दिया है, तो समान परिस्थितियों वाले बाकी कर्मचारियों को केवल clerical mistakes, प्रशासनिक लापरवाही या नाम छूट जाने के कारण वंचित नहीं किया जा सकता।

माननीय न्यायालय ने कहा कि: ✅ समान कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

✅ सरकार Article 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन नहीं कर सकती।

✅ “उमा देवी” निर्णय का गलत सहारा लेकर पहले से लागू नीति से पीछे नहीं हट सकती।

✅ सरकार एक “Model Employer” है और उसे अपने कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सरकार की नीति और आश्वासनों के आधार पर “Legitimate Expectation” थी कि

Wednesday, May 13, 2026

TET मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का सार दिनांक 13 मई 2026

टेट अनिवार्य प्रकरण मामले पर एक्सेप्ट हुई रिव्यू याचिका पर आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई 

जिसमें 

आज उत्तर प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्य, शिक्षक संघ और शिक्षक शिक्षिकाओं की याचिकाएं दाखिल थी 

याचिका पर कई सीनियर एडवोकेट ने पक्ष रखा जिसमें श्री विक्रमजीत बनर्जी जी (एएसजी), श्री राकेश द्विवेदी , श्री भट्टाचार्य जी, श्री जयदीप गुप्ता जी, श्री पीएस पटवालिया जी ,डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी जी, श्री मुकुल रोहतगी जी ने पक्ष रखा। 

पूरी सुनवाई को सभी अधिवक्ता टेट से छूट देने पर केंद्रित करते दिखे लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिर्फ आरटीई एक्ट के सेक्शन 23(2) पर बात करना चाहता था , सबसे बड़ी बात जो देखने को मिली वो ये कि रिव्यू एक्सेप्ट होने के बाद भी केंद्र सरकार कि तरफ से पहल करते हुए किसी भी वरिष्ठ अधिवक्ता या कहें सालीसीटर जनरल ने लाखों कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को बचाने कि कोई पहल नहीं कि 

इतने वृहद मामले को और इतने अधिवक्ताओं को कोर्ट ने जिस तरह से एक ही दिन में सुनकर आर्डर को रिजर्व कर लिया है , देखने वाली बात होगी कि क्या कोर्ट पूरे देश के लाखों कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर किसी भी तरह से कोई सहानुभूतिपूर्ण विचार करके फैसला देती है या नहीं 


TET की बाध्यता के आदेश पर review याचिका पर फैसला सुरक्षित।




सुप्रीम कोर्ट के TET की बाध्यता के आदेश के विरुद्ध दायर की गई याचिकाओं में आज सुनवाई हुई। 2 घंटे बहस हुई। मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता शिक्षकों का पक्ष रखने पहुँचे। सभी अधिवक्ताओं ने RTE, RTE amendment 2017 NCTE guidelines, और 2012 में संशोधित NCTE GUIDELINES का विस्तार से हवाला दिया और मांग की की TET की बाध्यता 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर न्याय संगत नहीं है।



माननीय न्यायलय ने सभी बिंदुओं को संज्ञान में लिया है, बंगाल राज्य सरकार ने TET कराने के समयसीमा 2 से बढाकर 4 साल करने की माँग की है।



AIPTF की पूरी टीम और अधिवक्ता ने पूरी सुनवाई में शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखा है, उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट से देश के 25 लाख शिक्षकों को न्याय मिलेगा।

Thursday, April 30, 2026

प्रमोशन और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य टेट प्रकरण में 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी

 सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली 

प्रमोशन और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य टेट प्रकरण में 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी



Thursday, April 16, 2026

ऐतिहासिक पोजिटिव फैसला आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण GROUP C&D को प्रत्यक्ष लाभ DATED 16 APRIL 2026

 थैंक्स सुप्रीम कोर्ट...बधाई हो.....ऐतिहासिक पोजिटिव फैसला....आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण GROUP C&D को प्रत्यक्ष लाभ तथा... गेस्ट टीचर्स को प्रत्यक्ष लाभ तो नहीं मिला लेकिन गेस्ट साथी जो याचिकाकर्ता थे...उनके कारण निकट भविष्य में....सभी के लिए लाभकारी निर्देश जारी हो...उसकी नींव जरूर रख दी है

मैने थोड़ी देर पहले जो एक पोस्ट की थी...वो पोस्ट सभी साथियों को समझ नहीं आई थी....तब डिटेल नहीं बताई जा सकती थी....कोर्ट की अवहेलना व प्रोटोकॉल डर के कारण..मेरी ऐसी पोस्ट 5 मिनट में ही समस्त हरियाणा में फैल जाती है....कम शब्दों में अधिक समझा करें...इशारों में फैसला बताया गया था... तब तक सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं दिया था..... फैसला तो अभी

Tuesday, March 10, 2026

HPSC का ड्रग कंट्रोलर की भर्ती शेड्यूल जारी

 HPSC का ड्रग कंट्रोलर की भर्ती शेड्यूल जारी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला- अनुभव की शर्त गलत, डिग्री के आधार पर करवाए इंटरव्यू*


*हरियाणा लोक सेवा आयोग ने ड्रॅग कंट्रोल अफसर भर्ती का इंटरव्यू शेड्यूल जारी कर दिया है। इंटरव्यू शेडयूल के अनुसार 12 मार्च को सुबह व दोपहर के सत्र में अभ्यर्थियों को बुलाया गया है। भर्ती प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद आयोग ने शेड्यूल जारी किया है।*


*हरियाणा लोक सेवा आयोग के द्वारा भर्ती प्रक्रिया साल 2015 में शुरू की गई थी, लेकिन कोर्ट केस के कारण मामला लंबित चल रहा था। अब केस का फैसला आने के बाद आयोग ने 50 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया है। कोर्ट में जाने वाले 5 कैंडिडेट को इंटरव्यू के समय अपने आवेदन की मूल कॉपी साथ लाने के निर्देश जारी किए गए हैं।*


`अब जानिए सुप्रीम कोर्ट का फैसले में क्या खास`


अतिरिक्त अनुभव की शर्त अवैध: कोर्ट ने फैसला दिया कि राज्य सरकारें ड्रग इंस्पेक्टरों की नियुक्ति के लिए 'अनुभव' (जैसे 18 महीने का अनुभव) की ऐसी कोई अतिरिक्त शर्त नहीं जोड़ सकती, जो केंद्रीय नियमों में नहीं है।

केंद्रीय कानून की सर्वोच्चता: जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने स्पष्ट किया कि 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' एक केंद्रीय कानून है, इसलिए, राज्य सरकारें आर्टिकल 309 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करके केंद्रीय योग्यता मानदंडों को बदल नहीं सकती।

नियम 49 की व्याख्या: कोर्ट के अनुसार, ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 49 के तहत नियुक्ति के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता (डिग्री) अनिवार्य है। अनुभव की आवश्यकता केवल नियुक्ति के बाद विशिष्ट निरीक्षण कार्यों के लिए होती है, न कि प्रारंभिक भर्ती के लिए।

नई मेरिट लिस्ट का निर्देश: कोर्ट ने दोनों राज्यों के लोक सेवा आयोगों को निर्देश दिया है कि वे केवल केंद्रीय शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर 8 सप्ताह के भीतर नई मेरिट लिस्ट तैयार करें।

उम्मीदवारों के लिए राहत: इस फैसले से उन युवाओं को राहत मिली है, जिनके पास डिग्री तो थी, लेकिन अनुभव न होने के कारण वे भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। अब केवल शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी इस पद के लिए पात्र माने जाएंगे।

Case for Releasing Dearness Allowance of 18 months CWP 7021-2026

 


Wednesday, February 11, 2026

सीबीआई ने सरकारी स्कूलों में फर्जी दाखिले के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की



चंडीगढ़, 10 फरवरी

सीबीआई, चंडीगढ़ ने मंगलवार को राज्य सरकार के स्कूलों में चार लाख फर्जी दाखिलों से संबंधित एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।

करनाल में दिनांक 30 मार्च, 2018 को दर्ज एफआईआर संख्या 4 में 50,687 मामलों को उजागर किया गया है।

करनाल, पानीपत और जिंद जिलों में प्राथमिक शिक्षा में स्कूल छोड़ने वाले, स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र (एसएलसी) प्राप्त न करने वाले और अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की संख्या।


इसी प्रकार, हिसार में दिनांक 30 मार्च, 2018 को दर्ज एफआईआर संख्या 8 में हिसार, भिवानी, सिरसा और फतेहाबाद जिलों में ऐसे 5,735 मामले दर्ज किए गए। फरीदाबाद में दिनांक 30 मार्च, 2018 को दर्ज एफआईआर संख्या 3 में वर्ष 2014-15 में प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट या एसएलसीएस या अनुपस्थित रहने के 2,777 मामले और वर्ष 2015-16 में 2,063 मामले दर्ज किए गए।


इसके बाद, राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया गया कि वे प्रत्येक जिले से 10 पुलिस कर्मियों (लगभग 200) को अस्थायी रूप से ब्यूरो की सहायता के लिए नियुक्त करें। इन कर्मियों को विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान किए गए ताकि वे अपना काम कर सकें।प्रवेश पाने वाले छात्रों की संख्या, स्कूल छोड़ने की दर और दोपहर के भोजन, वर्दी, स्कूल बैग और किताबों जैसे लाभों के उपयोग से संबंधित डेटा एकत्र करें।

12,924 स्कूलों से डेटा एकत्र किया गया, जिसमें 5% से 20% तक की अलग-अलग ड्रॉपआउट दर वाले स्कूलों की पहचान की गई। 22 जिलों के कुल 532 स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 40% से अधिक थी। विशेष रूप से, नूह में ऐसे 86 स्कूल, महेंद्रगढ़ में 69, गुरुग्राम में 35, भीवानी में 34, सोनीपत में 29, झज्जर में 28, हिसार में 25 और पलवल और यमुनानगर में 22-22 स्कूल थे।



*22 लाख छात्रों में से केवल 15 लाख ही असली है।*


पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अतिथि शिक्षकों से संबंधित कार्यवाही के दौरान कथित फर्जी नामांकन का मामला सामने आया था। मार्च 2016 में आंकड़ों की जांच करने पर पता चला कि राज्य सरकार के स्कूलों में सभी कक्षाओं में नामांकित 22 लाख छात्रों में से केवल 18 लाख ही वास्तविक थे

जांच में कथित देरी के कारण, अदालत ने 2 नवंबर, 2019 को सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया।


सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई। सीबीआई ने चार मामले दर्ज करने के बाद 2024 में जांच शुरू की।


18 जुलाई, 2024 को। इनमें से दो मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। एक मामले में, चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर रामबीर ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया है, वे काफी विशाल हैं, लगभग 35,000 पृष्ठों के हैं, और उन्हें क्लोजर रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया है, और अदालत के निर्देशानुसार उन्हें प्रस्तुत किया जाएगा।

Thursday, December 10, 2015

हरियाणा पंचायती राज संशोधन कानून-2015 पर कोर्ट ने सरकार के हक में फैसला सुनाया


पानीपत। हरियाणा पंचायती राज संशोधन कानून-2015 पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हरियाणा सरकार को राहत दी है। कोर्ट ने सरकार के हक में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार की सभी शर्तों को मान लिया है।
गौरतलब है कि सरपंचों का कार्यकाल 25 जुलाई- 15 को खत्म हो चुका है। चुनाव से ठीक पहले 11 अगस्त को हरियाणा सरकार ने पंचायती राज कानून में संशोधन किया था। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए 4 शर्तें लगाई थीं। लेकिन एक जनहित याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में सरकार के इस फैसले को चुनौती दे दी गई थी।
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ये है अभी तक का पूरा घटनाक्रम
7 सितंबर सरकार ने पंचायती राज संशोधन विधेयक-2015 विधानसभा में पारित किया।
ये शर्तें की लागू
- सामान्य श्रेणी के 10वीं पढ़े और महिलाएं वव अनुसूचित जाति के पुरुषों के लिए 8वीं पास होना जरुरी।
- पंच पद के लिए अनुसूचित महिला के लिए शैक्षणिक योग्यता 5वीं पास रहेगी।
- बिजली बिल भरना व सहकारी

Saturday, June 13, 2015

Collegium system would be revived automatically if the 99th Constitutional Amendment and NJAC Act fail to pass the test of Law: Supreme Court


June 13, 2015 by Live Law News Network
Delhi: The Union government on friday submitted before the Supreme Court that the tax payers had a right to know the quality of judges appointed to the higher judiciary. “A tax payer may say that I pay your (judges) salaries, I have a right to know who is going to be a judge,” Attorney General Mukul Rohatgi told the constitution bench comprising of Justice Jagdish Singh Khehar, Justice J. Chelameswar, Justice Madan B. Lokur, Justice Kurian Joseph and Justice Adarsh Kumar Goel.
Continuing his attack on the “nepotism” in the collegium system, he said that “a judge who has given not more than 50 judgments in 15 years during his stint with various high courts can’t be elevated to the top court”.
Citing the case of a judge who left hundreds of judgments reserved across various high courts and never pronounced them, Rohatgi said: “It is collegium that gave him laurels after laurels and brought

Friday, June 5, 2015

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिंदी लेक्चरर की 54 पोस्ट के लिए अप्लाई करे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिंदी लेक्चरर की 54 पोस्ट के लिए अप्लाई करे।
The online application can be filled up from 12th June, 2015 to 3rd July, 2015 till 5.00 P.M. through CDAC-Mohali website