Friday, August 28, 2026
Wednesday, August 12, 2026
Tuesday, August 11, 2026
Friday, August 7, 2026
DSE: Download Promotion Orders to the Post of PGT (Various Subjects) – ROH Cadre / Mewat Cadre (07.08.2026)
DSE: Download Promotion Orders to the Post of PGT (Various Subjects) – ROH Cadre / Mewat Cadre (07.08.2026)
Click here to Download ROH Cadre Orders
Thursday, August 6, 2026
Monday, August 3, 2026
Thursday, July 30, 2026
Wednesday, July 29, 2026
Tentative revised schedule for data verification and authentication for the upcoming online teacher transfer drive 2026
Tuesday, July 28, 2026
Updation of Organization details for Couple Case on MIS Portal (by Aug 2, 2026) under the Teachers Transfer Policy, 2026.
Updation of Organization details for Couple Case on MIS Portal (by Aug 2, 2026) under the Teachers Transfer Policy, 2026.
Read & follow steps for couple case points
E-mail List of Technical Resources All Haryana
Monday, July 27, 2026
हरियाणा: DIETs में ट्रांसफर बेसिस पर होगी सीनियर्स लेक्चरर और PGTs की भर्ती
हरियाणा: DIETs में ट्रांसफर बेसिस पर होगी सीनियर्स लेक्चरर और PGTs की भर्ती, ऑनलाइन आवेदन 28 जुलाई से शुरू
चंडीगढ़:
हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) में खाली पड़े पदों को ट्रांसफर बेसिस (Transfer Basis) पर भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, केवल वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जो वर्तमान में सरकारी स्कूलों में नियमित कैडर के प्रिंसिपल या पीजीटी/लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं।
इच्छुक और योग्य अधिकारी/कर्मचारी 28 जुलाई 2026 से 3 अगस्त 2026 तक एमआईएस (MIS) पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
📌 किन पदों के लिए मंगाए गए हैं आवेदन?
* सीनियर लेक्चरर (Senior Lecturer): इस पद के लिए केवल नियमित स्कूल कैडर के प्रिंसिपल्स आवेदन कर सकते हैं।
* सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट / लेक्चरर / पीजीटी (Subject Specialist/Lecturer/PGTs): इस पद के लिए नियमित स्कूल कैडर के पीजीटी/लेक्चरर पात्र हैं।
🎓 शैक्षणिक योग्यता (Qualifications)
* मास्टर डिग्री: संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50% अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन (M.A./M.Sc. आदि) होना अनिवार्य है।
* प्रोफेशनल डिग्री (निम्न में से कम से कम एक शर्त पूरी होना आवश्यक):
* न्यूनतम 50% अंकों के साथ M.Ed. या M.A. (Education)।
* संबंधित शिक्षण विषय में M.Phil. या Ph.D. के साथ 50% अंकों के साथ B.Ed.।
📊 चयन प्रक्रिया और अंकों का विवरण (Selection Criteria - कुल 50 अंक)
उम्मीदवारों का अंतिम चयन साक्षात्कार (Interview) और शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर किया जाएगा। अंकों का वितरण निम्न प्रकार से होगा:
| योग्यता / मापदंड | अधिकतम अंक | अंक निर्धारण का नियम |
|---|---|---|
| M.A./M.Sc./M.P.Ed. | 10 अंक | प्राप्त प्रतिशत का 10% |
| M.Ed./M.A. Education | 10 अंक | प्राप्त प्रतिशत का 10% |
| B.Ed. | 05 अंक | प्राप्त प्रतिशत का 5% |
| M.Phil | 05 अंक | प्राप्त प्रतिशत का 5% |
| Ph.D / D.Lit. | 05 अंक | एकमुश्त 5 अंक |
| अनुभव (Experience) | 05 अंक | प्रति वर्ष 0.5 अंक (अधिकतम 5) |
| इंटरव्यू (Viva) | 10 अंक | साक्षात्कार के आधार पर |
| कुल अंक | 50 अंक | |
⚠️ महत्वपूर्ण नियम व शर्तें (Key Guidelines)
* स्टेशन सीमा: उम्मीदवार केवल एक ही स्टेशन के लिए आवेदन कर सकता है।
* मेवात कैडर: मेवात कैडर के प्रिंसिपल या पीजीटी केवल नूह (Nuh) जिले के DIET के लिए ही आवेदन करने के पात्र हैं।
* आरोही और मॉडल संस्कृत स्कूल: यदि आरोही मॉडल स्कूल या मॉडल संस्कृति स्कूल में कार्यरत प्रिंसिपल/पीजीटी का वर्तमान स्थान पर कार्यकाल 3 वर्ष से कम है, तो उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
* दस्तावेज़ संलग्नक: आवेदन पत्र के साथ एमआईएस पोर्टल से अपनी वर्तमान पोस्टिंग दर्शाने वाली 'सर्विस प्रोफाइल' (Service Profile) का प्रिंटआउट संलग्न करना अनिवार्य है। इसके अलावा अन्य कोई दस्तावेज साथ लगाने की आवश्यकता नहीं है।
* डिग्री वेटेज: उम्मीदवारों को पोर्टल पर अपनी B.Ed. सहित सभी योग्यताओं का विवरण भरना होगा। विवरण दर्ज न करने पर उस डिग्री (जैसे B.Ed.) का वेटेज/अंक नहीं मिलेगा।
* वेतनमान: चयनित उम्मीदवारों का ट्रांसफर वर्तमान वेतनमान और उन्हीं सेवा शर्तों पर किया जाएगा।
> आवेदन की तिथि: 28 जुलाई 2026 से 03 अगस्त 2026 तक (MIS Portal पर
Saturday, July 25, 2026
Thursday, July 23, 2026
APAAR ID की अनिवार्यता खत्म
APAAR ID की अनिवार्यता खत्म
*पेरेंट्स को मिलेगा हां या ना का विकल्प, देशभर में ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला लागू*
*सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है।*
`भुवनेश्वर के पेरेंट्स ने दायर की याचिका`
भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ पेरेंट्स ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
`पहले से मना करने का अधिकार भी हो`
APAAR ID को सरकार स्वैच्छिक बता रही है, लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।
`सरकार का फैसला पेरेंट्स के पक्ष में`
केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।
`छात्रों के अधिकार नहीं होंगे प्रभावित`
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं रखा किया जाना चाहिए।
`APAAR ID 12 अंकों की छात्र पहचान`
अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान (स्टूडेंट आईडी) है।
इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।
`सरकार का दावा - छात्रों के हित में योजना`
सरकार और CBSE का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।
`डाटा लीक होने का खतरा बढ सकता है`
याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डाटा एक जगह इकट्ठा होने से डाटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।
यदि किसी वजह से डाटा का गलत इस्तेमाल होता है तो बच्चों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई पेरेंट्स का कहना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में परेशानी हो सकती है।





























