Wednesday, March 18, 2026

BSEH : राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत त्रि-भाषाई सूत्र लागू

नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को पढऩा होगा एक अतिरिक्त अनिवार्य विषय


*बोर्ड प्रकाशित करवाने जा रहा है स्मार्ट पाठ्य पुस्तक, क्यूआर कोड को स्कैन करके विषय को विस्तार से समझ सकेंगे विद्यार्थी*


*हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत त्रि-भाषाई सूत्र लागू करने का निर्णय लिया है। भ्इसके अनुसार कक्षा 9वीं व 10वीं के विद्यार्थियों को हिन्दी व अंग्रेजी के अलावा एक अन्य भाषा पढऩी होगी, जिसमें संस्कृत/उर्दू/पंजाबी में से किसी एक भाषा को अनिवार्य भाषा के रूप में चयन करना आवश्यक होगा।*

*इस आशय की विस्तृत जानकारी देते हुए आज यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बोर्ड अध्यक्ष डॉ० पवन कुमार एवं उपाध्यक्ष श्री सतीश शाहपुर ने बताया कि इस निर्णय से विद्यार्थियों के भाषाई कौशल में सुधार होगा और बहुभाषिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत अब विद्यार्थियों को कुल सात विषयों का अध्ययन करना होगा, जिनमें छ: अनिवार्य एवं एक वैकल्पिक विषय होगा।  उन्होंने आगे कहा कि अगर हरियाणा के विद्यार्थी वैकल्पिक भाषा पढ़ेंगे तो इससे रोजगार के अवसर अन्य प्रदेशों में भी बढ़ेंगे, दूसरे प्रदेशों से अच्छा समन्वय भी स्थापित होगा और प्रदेश में शिक्षा का स्तर भी ऊंचा होगा।*

*उन्होंने बताया कि त्रि-भाषाई सूत्र लागू  होने से विद्यार्थियों को कुल छ: अनिवार्य विषयों एवं एक वैकल्पिक विषय सहित कुल सात विषयों का अध्ययन करना होगा और छ: विषयों को पास करने की बाध्यता रहेगी। ऐसे में वर्तमान में प्रचलित बेस्ट फाइव फॉर्मूले के स्थान पर बेस्ट सिक्स फॉर्मूला लागू किया जाएगा। त्रि-भाषाई सूत्र हरियाणा मुक्त विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भी लागू रहेगा।*

*उन्होंने आगे बताया कि शारीरिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों को वर्तमान में विषय प्रणाली अनुसार अनिवार्य दो भाषाओं में से किसी एक भाषा के चयन में छूट रहेगी। अक्षम विद्यार्थियों के लिए स्थापित विशेष विद्यालयों में इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL)पहले से ही काफी सहयोगी व उपयोगी रही है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड देश का पहला ऐसा बोर्ड होगा जो अक्षम विद्यार्थियों के लिए पठन-पाठन में सांकेतिक भाषा अलग से एक विषय के तौर पर लागू करने जा रहा है।*

*इसके अतिरिक्त बोर्ड अध्यक्ष डॉ० पवन कुमार ने बताया कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अब स्मार्ट पाठ्य पुस्तक प्रकाशित करवाने जा रहा है, जिसमें हर पाठ्य पुस्तक के साथ प्रकाशित क्यूआर कोड को स्कैन करके विद्यार्थी विषय को विस्तार से समझ सकेंगे। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही विद्यार्थी के मोबाइल पर संबंधित पाठ का लैक्चर वीडियो चल जाएगा।

DEO/BEO Flying duty cancellation orders w.e.f 18-03-2026


 

Notice regarding cancellation of candidature of TGTs (Social Science). (18.03.2026)






 

Tuesday, March 17, 2026

Regarding collection of old notebooks and distribution of new for the session 2026-27


 

Transfer Related News from High Court Dated 16 March 2026

 हरियाणा की शिक्षक स्थानांतरण नीति के गलियारों से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर छनकर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, कल माननीय उच्च न्यायालय के भीतर का माहौल काफी गर्माया हुआ रहा, जहाँ सरकार की मौजूदा ट्रांसफर पॉलिसी सीधे तौर पर न्याय के तराजू पर तौल दी गई। कोर्ट रूम के भीतर चली लंबी बहस के बाद जो जानकारी सामने आई है, वह उन हजारों शिक्षकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो इस नीति के भरोसे बैठे थे माननीय जज साहब ने आज सरकार के पैरोकारों (AAG) की दलीलों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए पॉलिसी की बुनियादी खामियों पर कड़े प्रहार किए।

सूत्रों का कहना है कि न्यायालय ने विशेष रूप से विकलांगों और कपल केस के बीच अंकों की असमानता को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जताई है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली और तार्किक टिप्पणी पुरुषों के अधिकारों को लेकर आई, जहाँ कोर्ट ने सीधा सवाल दागा कि क्या इस पूरी व्यवस्था में जेंट्स (पुरुषों) का कोई वजूद या अधिकार नहीं है? केवल एक पक्ष को वरीयता देने की नीति पर अदालत कतई संतुष्ट नहीं दिखी और यहाँ तक चेतावनी दे डाली कि यदि इस भेदभावपूर्ण नीति में सुधार नहीं किया गया, तो अगली सुनवाई पर पूरी पॉलिसी को 'क्रैश' यानी जड़ से खत्म करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

अदालत के इस कड़े रुख को देखते हुए सरकारी वकीलों ने स्थिति को संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन अनुभवी वकीलों की भारी-भरकम दलीलों के आगे उनकी एक न चली। आखिरकार सरकार ने इस मामले में गहराई से विचार करने के लिए 31 मार्च तक का समय मांगा है, जिसके चलते अब अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है। तब तक के लिए पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को 'होल्ड' पर डाल दिया गया है। गुप्त सूत्रों की मानें तो यह 1 अप्रैल की तारीख हरियाणा के शिक्षा विभाग और नीति निर्धारकों के लिए अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। अब सभी को आधिकारिक कोर्ट ऑर्डर का इंतज़ार है ताकि इस कानूनी दांव-पेच की परतें और भी साफ हो सकें।

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