Thursday, July 23, 2026

Legal notice for Removing the anomaly arising out of the implementation of the Teacher Transfer Policy, 2026 Dated 23-07-2026



*लीगल नोटिस का सारांश*


*प्रेषक:*  

संचित पुनिया, एडवोकेट  

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़  

दिनांक: 23.07.2026


*प्रति:*  

1. अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग, सिविल सचिवालय, चंडीगढ़  

2. निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, हरियाणा, शिक्षा सदन, सेक्टर-5, पंचकूला  

3. निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, हरियाणा, शिक्षा सदन, सेक्टर-5, पंचकूला


*विषय:*  

टीचर ट्रांसफर पॉलिसी, 2026 को लागू करने से उत्पन्न विसंगति को दूर करने के संबंध में लीगल नोटिस।  

मांग है कि हरियाणा सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कर्मचारियों द्वारा दी गई _पूरी निरंतर नियमित सरकारी सेवा_, जिसमें पदोन्नति से पहले फीडर टीचिंग कैडर की सेवा भी शामिल है, उसे "कैडर में अनुभव" के अंक निर्धारण में गिना जाए।


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*मुख्य बिंदु:*


*1. समस्या क्या है*  

पॉलिसी 2026 में "कैडर में अनुभव" के 30 अंक केवल उसी तारीख से गिने जा रहे हैं जिस दिन शिक्षक ने वर्तमान कैडर जॉइन किया। इस कारण पदोन्नति से पहले फीडर कैडर में की गई सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।


*2. इससे क्या नुकसान हुआ*  

- जिन शिक्षकों ने कई साल सरकारी सेवा की है लेकिन प्रमोशन लिया, उनके अनुभव के अंक कम हो गए।  

- जो शिक्षक सीधी भर्ती से नए कैडर में आए, उन्हें ज्यादा अंक मिल रहे हैं।  

- इससे ट्रांसफर मेरिट घट गई और पसंदीदा स्टेशन मिलने के अवसर कम हो गए।


*3. कानूनी तर्क*  

- पदोन्नति सेवा में उन्नति है, नई नियुक्ति नहीं। फीडर कैडर की सेवा निरंतर सेवा का अभिन्न हिस्सा है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  

- पदोन्नति के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारी एक ही वर्ग बन जाते हैं। उनके कर्तव्य, अधिकार और सेवा शर्तें समान होती हैं। केवल पदोन्नत कर्मचारियों की पिछली सेवा न गिनना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।  

- अनुभव के अंक देने का उद्देश्य ही लंबे समय की सेवा से अर्जित ज्ञान, कौशल और परिपक्वता को मान्यता देना है। पदोन्नति से अनुभव समाप्त नहीं होता।


*4. पिछली पॉलिसी*  

2016, 2017, 2023 और 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी में पदोन्नत शिक्षकों की पिछली नियमित सरकारी सेवा को बाहर नहीं किया गया था।


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*मांगें:*

1. टीचर ट्रांसफर पॉलिसी, 2026 में उत्पन्न विसंगति को दूर किया जाए और "कैडर में अनुभव" में पूरी निरंतर सरकारी सेवा को शामिल किया जाए।  

2. ट्रांसफर के लिए "अनुभव" के अंक देते समय कैडर को न देखा जाए, पूरी सेवा को गिना जाए।  

3. सभी प्रभावित शिक्षकों की ट्रांसफर मेरिट उनकी सरकारी सेवा में पहली नियुक्ति की तारीख से दोबारा गिनी जाए।  

4. "कैडर में अनुभव" वाले प्रावधान को तब तक स्थगित किया जाए जब तक उपरोक्त विसंगति को ठीक करके मेरिट को कानून के अनुसार संशोधित न कर दिया जाए।


यदि मांगें नहीं मानी गईं तो सक्षम न्यायालय में कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सभी खर्चों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी



जनगणना : एक अगस्त से शुरू होगा जनगणना का दूसरा चरण

 जनगणना : एक अगस्त से शुरू होगा जनगणना का दूसरा चरण, एसडीएम ने दिए निर्देश


*महेंद्रगढ़ में जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के सफल संचालन हेतु पटवारियों को प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उपमंडल अधिकारी (ना.) महेंद्रगढ़ योगेश सैनी की अध्यक्षता में राजकीय महाविद्यालय महेंद्रगढ़ के शांति देवी मेमोरियल हॉल में आयोजित हुआ। इसमें महेंद्रगढ़ एवं सतनाली तहसील के पटवारी शामिल हुए।*


*प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना-2027 के अंतर्गत डीसीएचबी (डिजिटल हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) के डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रहण संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई। पटवारियों को कार्य को समयबद्ध और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।*


`सावधानीपूर्वक सत्यापन करने दिया जोर`


एसडीएम योगेश सैनी ने इस अवसर पर कहा कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय प्रक्रिया है। इसके आधार पर ही विकास योजनाओं का निर्माण और संसाधनों का उचित आवंटन सुनिश्चित किया जाता है।


उन्होंने सभी पटवारियों से पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ इस महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने डेटा संग्रहण के दौरान प्रत्येक जानकारी का सावधानीपूर्वक सत्यापन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।


तहसीलदार एवं चार्ज ऑफिसर जनगणना अजय कुमार सैनी ने उपस्थित अधिकारियों एवं पटवारियों को जनगणना-2027 के उद्देश्य, महत्व और विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने सभी अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आग्रह किया, ताकि जनगणना का कार्य निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा हो सके।


नायब तहसीलदार बिजेंद्र शर्मा ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान दिए गए दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करने और क्षेत्र में कार्य करते समय निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।


`समस्याओं के समाधान की दी जानकारी`


प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला जनगणना समन्वयक एवं मास्टर ट्रेनर अनिकेत यादव ने पटवारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीसीएचबी डेटा संग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने डेटा एंट्री, सत्यापन, मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और फील्ड स्तर पर आने वाली संभावित समस्याओं के समाधान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।


सहायक चार्ज ऑफिसर जनगणना राजेश शर्मा झाड़ली एवं दीपक कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत डीसीएचबी डेटा संग्रहण का कार्य 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक डिजिटल माध्यम से किया जाएगा।


Transfer Driver Schedule dated 23-07-2026


 


 

APAAR ID की अनिवार्यता खत्म

 APAAR ID की अनिवार्यता खत्म 


*पेरेंट्स को मिलेगा हां या ना का विकल्प, देशभर में ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला लागू*


*सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कोई भी स्कूल खुद बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इसके लिए माता-पिता की मर्जी जरूरी है।*


`भुवनेश्वर के पेरेंट्स ने दायर की याचिका`


भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ पेरेंट्स ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।


`पहले से मना करने का अधिकार भी हो`


APAAR ID को सरकार स्वैच्छिक बता रही है, लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।


`सरकार का फैसला पेरेंट्स के पक्ष में`


केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।


`छात्रों के अधिकार नहीं होंगे प्रभावित`


याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं रखा किया जाना चाहिए।


`APAAR ID 12 अंकों की छात्र पहचान`


अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल के तहत हर छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान (स्टूडेंट आईडी) है।


इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।


`सरकार का दावा - छात्रों के हित में योजना`


सरकार और CBSE का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।


`डाटा लीक होने का खतरा बढ सकता है`


याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डाटा एक जगह इकट्ठा होने से डाटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।


यदि किसी वजह से डाटा का गलत इस्तेमाल होता है तो बच्चों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई पेरेंट्स का कहना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में परेशानी हो सकती है।