यह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (चंडीगढ़) का एक मुख्य अदालती आदेश है, जिसे माननीय जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और माननीय जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 21 मई 2026 को सुनाया था। इस पूरे मामले का मुख्य केंद्र बिंदु हरियाणा सरकार की सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई ट्रांसफर यानी स्थानांतरण नीति थी, जिसे विजय चौधरी, सविता मारवाहा, अमितेश बोकेन और कई अन्य कर्मचारियों ने याचिकाओं के माध्यम से अदालत में चुनौती दी थी। इन कर्मचारियों का मुख्य ऐतराज यह था कि सरकार ने इस नीति को बनाने में अतार्किक और गलत आधार चुने हैं, और खासकर ट्रांसफर करने के लिए कर्मचारियों की उम्र को जरूरत से ज्यादा और बेवजह का महत्व दे दिया हैइस गंभीर विषय पर हाई कोर्ट ने पहले भी कई बार सुनवाई की थी और राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वे इस नीति की कमियों को देखें और नियमों के मुताबिक एक सही ढांचा तैयार करें।
इस अंतिम सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल प्रविंद्रा सिंह चौहान कोर्ट में हाजिर हुए और उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस ट्रांसफर नीति में बड़ा सुधार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने कोर्ट के सामने एक नया फार्मूला रखा जिसके तहत अब ट्रांसफर तय करने में उम्र को केवल 25% और कैडर के अनुभव को भी 25% ही महत्व दिया जाएगा, जबकि बाकी बचे हुए 50% हिस्से में कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों और दिक्कतों को नीति में शामिल किया जाएगा।
सरकार के इस सकारात्मक रुख को देखने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि जब राज्य सरकार खुद इस नीति पर दोबारा विचार करने और एक नई न्यायसंगत नीति लाने को राजी हो गई है, तो इन मुकदमों को कोर्ट में और आगे खींचने या लंबित रखने का कोई मतलब नहीं बनता。 इसी आधार पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए इस पूरे मामले और


