यह कॉलेज प्रोफेसरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
अब कॉलेज प्रोफेसरों के CAS (Career Advancement Scheme) के लाभ केवल इस आधार पर नहीं रोके जा सकते कि उन्होंने किसी निजी (Private) विश्वविद्यालय से PhD की डिग्री प्राप्त की है, यदि उन्होंने कॉलेज सेवा में नियुक्ति से पहले अपनी PhD पूरी की थी।
इससे पहले मंजू बाला मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने उच्च शिक्षा निदेशक को मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए थे, जिसके चलते निजी विश्वविद्यालयों से PhD करने वाले कई कॉलेज प्रोफेसरों के CAS लाभ लंबित रखे गए थे।
अब माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने कॉलेज सेवा में आने से पहले PhD की डिग्री प्राप्त की है, तो केवल इस आधार पर उसके CAS लाभ नहीं रोके जा सकते।



