कोर्ट बोला - 'स्पेयर पार्ट' नहीं हैं मास्टर जी, दो महीने में करो नियमित"
"20 साल का वनवास खत्म: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - 2 महीने में सभी गेस्ट टीचर होंगे पक्के"
Detail Order of Case
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कोर्ट बोला - 'स्पेयर पार्ट' नहीं हैं मास्टर जी, दो महीने में करो नियमित"
"20 साल का वनवास खत्म: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - 2 महीने में सभी गेस्ट टीचर होंगे पक्के"
Detail Order of Case
`HTET 2025 Exam Schedule कुछ इस प्रकार`
● *13 June 2026* Level-1 Exam
● *14 June 2026* Level-2 Exam, • Level-3 Exam
Haryana भर में 820 Exam Centres बनाए गए हैं।
*इस बार नकल रोकने के लिए विशेष इंतजाम:*
1. QR Code & Alpha Numeric Number on Question Paper
2. High Security Cameras at all centres
3. Biometric Verification before entry
4. OMR में 20 से अधिक प्रश्न खाली छोड़ने पर परीक्षा रद्द
यह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (चंडीगढ़) का एक मुख्य अदालती आदेश है, जिसे माननीय जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और माननीय जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 21 मई 2026 को सुनाया था। इस पूरे मामले का मुख्य केंद्र बिंदु हरियाणा सरकार की सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई ट्रांसफर यानी स्थानांतरण नीति थी, जिसे विजय चौधरी, सविता मारवाहा, अमितेश बोकेन और कई अन्य कर्मचारियों ने याचिकाओं के माध्यम से अदालत में चुनौती दी थी। इन कर्मचारियों का मुख्य ऐतराज यह था कि सरकार ने इस नीति को बनाने में अतार्किक और गलत आधार चुने हैं, और खासकर ट्रांसफर करने के लिए कर्मचारियों की उम्र को जरूरत से ज्यादा और बेवजह का महत्व दे दिया हैइस गंभीर विषय पर हाई कोर्ट ने पहले भी कई बार सुनवाई की थी और राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वे इस नीति की कमियों को देखें और नियमों के मुताबिक एक सही ढांचा तैयार करें।
इस अंतिम सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल प्रविंद्रा सिंह चौहान कोर्ट में हाजिर हुए और उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस ट्रांसफर नीति में बड़ा सुधार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने कोर्ट के सामने एक नया फार्मूला रखा जिसके तहत अब ट्रांसफर तय करने में उम्र को केवल 25% और कैडर के अनुभव को भी 25% ही महत्व दिया जाएगा, जबकि बाकी बचे हुए 50% हिस्से में कर्मचारियों की विशेष परिस्थितियों और दिक्कतों को नीति में शामिल किया जाएगा।
सरकार के इस सकारात्मक रुख को देखने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि जब राज्य सरकार खुद इस नीति पर दोबारा विचार करने और एक नई न्यायसंगत नीति लाने को राजी हो गई है, तो इन मुकदमों को कोर्ट में और आगे खींचने या लंबित रखने का कोई मतलब नहीं बनता。 इसी आधार पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए इस पूरे मामले और
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला कर्मचारियों के पक्ष में ⚖️
दिनांक 21 मई 2026 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने असम के Work Charged एवं Muster Roll कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने एक ही नीति के तहत लगभग 30,000 कर्मचारियों को नियमित कर दिया है, तो समान परिस्थितियों वाले बाकी कर्मचारियों को केवल clerical mistakes, प्रशासनिक लापरवाही या नाम छूट जाने के कारण वंचित नहीं किया जा सकता।
माननीय न्यायालय ने कहा कि: ✅ समान कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
✅ सरकार Article 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन नहीं कर सकती।
✅ “उमा देवी” निर्णय का गलत सहारा लेकर पहले से लागू नीति से पीछे नहीं हट सकती।
✅ सरकार एक “Model Employer” है और उसे अपने कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सरकार की नीति और आश्वासनों के आधार पर “Legitimate Expectation” थी कि