इस निर्णय का संक्षिप्त निष्कर्ष निम्नलिखित है:
1. याचिकाएं स्वीकार कर ली गईं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सभी संबंधित रिट याचिकाओं को मंजूर कर दिया।
2. 3rd ACP देने से इनकार करने का आदेश रद्द। 05.06.2023 का वह आदेश, जिसके द्वारा कर्मचारियों को 3rd ACP से वंचित किया गया था, न्यायालय ने निरस्त कर दिया।
3. 24 वर्ष की नियमित एवं संतोषजनक सेवा पूरी होने की तिथि से 3rd ACP देने का निर्देश। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को 2016 के हरियाणा ACP नियमों के अनुसार 24 वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने की तिथि से 3rd ACP का लाभ दिया जाए।
4. शैक्षणिक योग्यता के अभाव में ACP नहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि ACP केवल वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) है, पदोन्नति (Promotion) नहीं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कर्मचारी अगले पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करता, 3rd ACP से वंचित नहीं किया जा सकता।
5. बकाया राशि 6 सप्ताह में देने का आदेश। न्यायालय ने सभी एरियर एवं अन्य वित्तीय लाभों की गणना कर 6 सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।
व्यावहारिक प्रभाव
यदि कोई हरियाणा सरकार/स्थानीय निकाय का कर्मचारी केवल इसलिए 3rd ACP से वंचित किया गया है कि उसके पास अगले पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या प्रमोशनल योग्यता नहीं है, तो यह निर्णय उसके पक्ष में एक महत्वपूर्ण मिसाल (precedent) है। ACP को पदोन्नति नहीं बल्कि वित्तीय लाभ माना गया है।
Full Judgement Below










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