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Tuesday, May 26, 2026

HTET 2025 Exam Schedule

 `HTET 2025 Exam Schedule कुछ इस प्रकार`

● *13 June 2026* Level-1 Exam


● *14 June 2026* Level-2 Exam, • Level-3 Exam


Haryana भर में 820 Exam Centres बनाए गए हैं।


 *इस बार नकल रोकने के लिए विशेष इंतजाम:*

1. QR Code & Alpha Numeric Number on Question Paper 

2. High Security Cameras at all centres 

3. Biometric Verification before entry 

4. OMR में 20 से अधिक प्रश्न खाली छोड़ने पर परीक्षा रद्द




Wednesday, May 13, 2026

TET मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का सार दिनांक 13 मई 2026

टेट अनिवार्य प्रकरण मामले पर एक्सेप्ट हुई रिव्यू याचिका पर आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई 

जिसमें 

आज उत्तर प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्य, शिक्षक संघ और शिक्षक शिक्षिकाओं की याचिकाएं दाखिल थी 

याचिका पर कई सीनियर एडवोकेट ने पक्ष रखा जिसमें श्री विक्रमजीत बनर्जी जी (एएसजी), श्री राकेश द्विवेदी , श्री भट्टाचार्य जी, श्री जयदीप गुप्ता जी, श्री पीएस पटवालिया जी ,डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी जी, श्री मुकुल रोहतगी जी ने पक्ष रखा। 

पूरी सुनवाई को सभी अधिवक्ता टेट से छूट देने पर केंद्रित करते दिखे लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिर्फ आरटीई एक्ट के सेक्शन 23(2) पर बात करना चाहता था , सबसे बड़ी बात जो देखने को मिली वो ये कि रिव्यू एक्सेप्ट होने के बाद भी केंद्र सरकार कि तरफ से पहल करते हुए किसी भी वरिष्ठ अधिवक्ता या कहें सालीसीटर जनरल ने लाखों कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को बचाने कि कोई पहल नहीं कि 

इतने वृहद मामले को और इतने अधिवक्ताओं को कोर्ट ने जिस तरह से एक ही दिन में सुनकर आर्डर को रिजर्व कर लिया है , देखने वाली बात होगी कि क्या कोर्ट पूरे देश के लाखों कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर किसी भी तरह से कोई सहानुभूतिपूर्ण विचार करके फैसला देती है या नहीं 


Thursday, April 30, 2026

प्रमोशन और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य टेट प्रकरण में 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी

 सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली 

प्रमोशन और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य टेट प्रकरण में 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी



Monday, March 9, 2026

GK Indian Ancient History useful for TET,UPSC and Other Entrance Exam














 

TET अनिवार्यता में सुप्रीम कोर्ट द्वारा RTE Act 2009 से पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों की TET छूट को क्या समाप्त कर दिया गया है


विस्तृत विश्लेषण 

दिनांक 08/03/2026

द्वारा बृजेश दीक्षित


RTE Act, 2009 के संशोधन 2017 के क्रम में प्रश्नों के रूप में विश्लेषण:--


RTE (Amendment) Act, 2017 (जो 9 अगस्त 2017 को अधिसूचित हुआ और 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी माना गया) मुख्य रूप से RTE Act की धारा 23(2) में संशोधन करता है, जो शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता से संबंधित है। इस संशोधन का उद्देश्य उन शिक्षकों को अंतिम अवसर प्रदान करना था जो RTE Act, 2009 के लागू होने से पहले या 31 मार्च 2015 तक नियुक्त थे और NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता (जिसमें Teacher Eligibility Test - TET शामिल है) नहीं रखते थे। संशोधन ने इन शिक्षकों को योग्यता प्राप्त करने के लिए 31 मार्च 2019 तक की डेडलाइन दी, लेकिन उसके बाद कोई स्थायी छूट नहीं रखी। अब मैं (काउंटर एफिडेविट और NCTE अधिसूचना से संबंधित) का विश्लेषण इस संशोधन के क्रम में करता हूं, साथ ही RTE Act 2009 से पूर्व सेवारत NON-TET शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता पर स्पष्ट करता हूं। सभी बिंदु साक्ष्यों पर आधारित हैं।


   प्रश्न (1): *NCTE के काउंटर एफिडेविट के आधार पर RTE Act 2009 से पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों की छूट को क्या समाप्त कर दिया गया है?*


उत्तर -RTE Amendment Act, 2017 के क्रम में देखें तो काउंटर एफिडेविट (NCTE द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल) RTE Act की मूल भावना और संशोधन को मजबूत करता है। एफिडेविट में पैराग्राफ 12 और 13 RTE Act में कोई स्थायी छूट का प्रावधान न होने का उल्लेख करते हैं, और NCTE की अधिसूचनाओं के माध्यम से दिए गए अस्थायी रिलैक्सेशन को 2017 संशोधन के साथ जोड़ते हैं। संशोधन से पहले, RTE Act, 2009 की धारा 23(2) में प्रोविजो था कि केंद्र सरकार शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए 5 वर्ष (यानी 31 मार्च 2015 तक) का समय दे सकती है। लेकिन 2017 संशोधन ने इसमें एक अतिरिक्त प्रोविजो जोड़ा: "Provided further that every teacher appointed or in position as on the 31st March, 2015, who does not possess minimum qualifications as laid down under sub-section (1), shall acquire such minimum qualifications within a period of four years from the date of commencement of the Right of Children to Free and Compulsory Education (Amendment) Act, 2017." इसने छूट को 31 मार्च 2019 तक सीमित कर दिया, और एफिडेविट इसी को रेखांकित करता है कि RTE से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को कोई अनिश्चितकालीन छूट नहीं है।


- **संशोधन के क्रम में विश्लेषण**: 2017 संशोधन से पहले, NCTE की 23.08.2010 अधिसूचना ने TET को न्यूनतम योग्यता बनाया, लेकिन pre-2009 शिक्षकों को रिलैक्सेशन दिया गया था। संशोधन ने इसे अंतिम रूप दिया, और MHRD (अब MoE) के 03.08.2017 पत्र (जिसका एफिडेविट में उल्लेख है) ने राज्यों को सूचित किया कि 01 अप्रैल 2019 के बाद बिना योग्यता वाले शिक्षकों को सेवा में नहीं रखा जा सकता। एफिडेविट में 03.08.2017 के इस पत्र का संदर्भ छूट की समाप्ति की पुष्टि करता है, क्योंकि संशोधन के बाद कोई अतिरिक्त विस्तार नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी पुष्टि हुई है कि डेडलाइन के बाद छूट समाप्त हो जाती है, हालांकि कुछ मामलों में अनुच्छेद 142 के तहत सीमित राहत दी गई (जैसे 5 वर्ष से कम सेवा बाकी वाले शिक्षकों को TET बिना जारी रखने की अनुमति, लेकिन पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य)। व्यावहारिक रूप से, 2019 के बाद छूट समाप्त मानी जाती है, और एफिडेविट इसी को आधार बनाता है।


   प्रश्न (2): यदि NCTE की ऐसी अधिसूचना   दिनांक 17 अक्टूबर 2017  की विस्तृत जानकारी--

RTE Amendment Act, 2017 के क्रम में, NCTE ने कोई नई अलग अधिसूचना जारी नहीं की, बल्कि मौजूदा गाइडलाइंस (जैसे 23.08.2010 की अधिसूचना, जो TET को न्यूनतम योग्यता बनाती है) को संशोधन के अनुरूप लागू किया। NCTE की मुख्य अधिसूचना F. No. 61-03/20/2010/NCTE/(N&S) dated 23.08.2010 है, जिसमें TET को अनिवार्य किया गया, और 29.07.2011 में संशोधन हुए लेकिन TET की अनिवार्यता बनी रही। 2017 संशोधन के बाद, NCTE ने अपनी 2018-2019 की रिपोर्ट में RTE संशोधन को शामिल किया, लेकिन कोई नई TET-संबंधी अधिसूचना नहीं जारी की; मुख्य रूप से MHRD के 03.08.2017 DO पत्र ने राज्यों को निर्देशित किया कि NCTE गाइडलाइंस के तहत TET सहित योग्यता अनिवार्य है।


- **संशोधन के क्रम में विश्लेषण**: संशोधन ने NCTE की भूमिका को मजबूत किया, क्योंकि धारा 23(1) NCTE को न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार देती है। NCTE की 23.08.2010 अधिसूचना में स्पष्ट है कि TET "minimum qualification" का हिस्सा है, और 2017 संशोधन ने pre-2015 शिक्षकों को 2019 तक इसे पास करने का अंतिम मौका दिया। यदि कोई शिक्षक 2019 तक TET पास नहीं करता, तो सेवा समाप्ति संभव है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की। NCTE की 2019 संशोधन रेगुलेशंस (जैसे Amendment Regulations 2019) RTE संशोधन को सपोर्ट करती हैं, लेकिन TET की अनिवार्यता पर कोई बदलाव नहीं।


    *RTE Act 2009 से पूर्व सेवारत NON-TET शिक्षकों के लिए RTE संशोधन 2017 से TET की अनिवार्यता*

RTE Act 2009 से पूर्व (2009 से पहले) नियुक्त NON-TET शिक्षकों के लिए TET RTE Amendment Act, 2017 से अनिवार्य घोषित हुआ है, लेकिन एक समयबद्ध छूट के साथ। संशोधन से पहले, NCTE की 23.08.2010 अधिसूचना ने TET को न्यूनतम योग्यता बनाया, लेकिन pre-2009 शिक्षकों को शुरू में छूट दी गई (RTE Act की धारा 23(2) के तहत 31 मार्च 2015 तक)। 2017 संशोधन ने इसे विस्तारित कर 31 मार्च 2019 तक कर दिया, और स्पष्ट किया कि TET सहित NCTE-निर्धारित योग्यता अनिवार्य है। 2019 के बाद, TET अनिवार्य है, और बिना TET वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है।


- **साक्ष्य**:

  - **RTE Amendment Bill, 2017 (Section 23(2) का संशोधन)**: "Every teacher appointed or in position as on 31st March, 2015, who does not possess minimum qualifications... shall acquire such within four years." यह TET को शामिल करता है, क्योंकि NCTE अधिसूचना TET को "minimum qualification" मानती है।

  - **NCTE अधिसूचना 23.08.2010**: TET को Classes I-VIII के शिक्षकों के लिए अनिवार्य बनाया, और 2017 संशोधन ने pre-2009 शिक्षकों को लागू किया।

  - **सुप्रीम कोर्ट फैसले (2025)**: TET in-service शिक्षकों के लिए अनिवार्य है; pre-RTE शिक्षकों को 2 वर्ष का समय यदि 5 वर्ष से अधिक सेवा बाकी, अन्यथा छूट लेकिन पदोन्नति के लिए TET जरूरी। यह 2017 संशोधन की व्याख्या है कि TET गुणवत्ता का बेंचमार्क है।


कुल मिलाकर, 2017 संशोधन ने TET को pre-2009 NON-TET शिक्षकों के लिए अनिवार्य बनाया, लेकिन 2019 तक की डेडलाइन के साथ। डेडलाइन बीतने के बाद, TET बिना सेवा जारी रखना अवैध है, हालांकि हमारी स्वयं की रिव्यू पिटिशन Brajesh Kumar Dixit के नाम से एवं अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ AIPTF के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से भी रिव्यू पिटीशन तथा कुछ राज्यों के द्वारा भी समीक्षा याचिकाएं लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की डेट अभी Fixed नहीं हुई है, *उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट यदि उदारवादी दृष्टिकोण अपनाता है तो रिव्यू पिटीशन को 7 जजों की संवैधानिक पीठ को भेज सकती है।*


*बृजेश दीक्षित* 

 प्रदेश संगठनमंत्री 

*उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ*

*मो न 9997645809*

Saturday, March 7, 2026

भारत के सभी राज्यों के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान – States & Their Major National Parks

 भारत के सभी राज्यों के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान – States & Their Major National Parks (Bilingual)


 ➥ आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) 

▪️ श्री वेंकटेश्वर – Sri Venkateswara

▪️ पापिकोंडा – Papikonda


 ➥ अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) 

▪️ नामदाफा – Namdapha

▪️ मौलिंग – Mouling


 ➥ असम (Assam) 

▪️ काज़ीरंगा – Kaziranga

▪️ मानस – Manas

▪️ नामेरी – Nameri

▪️ ओरंग – Orang

▪️ डिब्रू–सैखोवा – Dibru–Saikhowa


 ➥ बिहार (Bihar) 

▪️ वाल्मीकि – Valmiki

Thursday, April 9, 2015

BIHAR:TET NA PASS KARNE WALE SHIKSHO KO HATANE BAARE HIGH COURT KA ORDER

IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA
Civil Writ Jurisdiction Case No.12239 of 2014
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1. Rizwana Khatoon, D/o- Md. Muslim, W/o- Md. Hafij, Resident of Vilage- Agari,
P.S.- Babubarhi, District- Madhubani. .... Petitioner/s
Versus
1. The State of Bihar through its Principal Secretary, Human Resources
Development Department, Bihar, Patna
2. The Director, Primary Education, Bihar, Patna
3. The Regional Deputy Director of Education, Darbhanga Division, Darbhanga
4. The District Magistrate, Madhubani
5. The District Education Officer, Madhubani
6. The Block Education Officer, Block- Babubarhi, District- Madhubani
7. The Panchayat Secretary, Gram Panchayat Raj- Sonmati, Block- Babubarhi,
District- Madhubani
8. The Mukhiya, Gram Panchayat Raj- Sonmati, District- Madhubani ... .... Respondent/s
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Appearance :
For the Petitioner/s : Mr. Lakshmindra Kumar Yadav
For the Respondent/s : Mr. SC28- Ajeet Kumar
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CORAM: HONOURABLE MR. JUSTICE AJAY KUMAR TRIPATHI
ORAL JUDGMENT
Date: 02-04-2015
The Principal Secretary, Education Department, Government of Bihar is a law by himself or at least he feels that what he says is the law of the land. If it is not true then he would not have issued Memo No.607/L dated 15.9.2014, which has the effect of nullifying the applicability of the various