Tuesday, May 28, 2013

BINA SURVEY KIYE BANTI JA RAHI IRON TABLETS

स्कूली बच्चों में खून की कमी बता कर जो दवा खाने को दी जा रही है, वास्तव में इस तरह का कोई सर्वे प्रदेश में हुआ ही नहीं। जिससे यह पता चल सके कि बच्चों में क्या वास्तव में खून की कमी है। इसके बाद भी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 16 लाख बच्चों को जबरदस्ती दवा खिलाने पर आमादा है। मिशन अधिकारियों को बच्चों की चिंता नहीं, इस बात से चिंतित है कि कैसे भी हो दवा बंटनी चाहिए। तभी तो दवा बंटवाने के लिए हर हथकंडा अपना जा रहा है।हेल्थ डीजी तक को नहीं पता कि किसने दिए टेबलेट बांटने के
निर्देश। अब स्वास्थ्य मंत्री भी हैरान हैं, आखिर किसने और कैसे 16 लाख बच्चों की सेहत दांव पर लगाई हेल्थ डीजी तक को नहीं पता कि किसने दिए टेबलेट बांटने के निर्देश। अब स्वास्थ्य मंत्री भी हैरान हैं, आखिर किसने और कैसे 16 लाख बच्चों की सेहत दांव पर लगाई दावा ये कि डब्ल्यूएचओ ने किया सर्वे : इधर, मिशन डायरेक्टर डॉक्टर राकेश गुप्ता का दवा है कि डब्ल्यूएचओ ने एक सर्वे किया था। क्या यह सर्वे हरियाणा में हुआ, इसका जवाब उनके पास नहीं है। जब प्रदेश में सर्वे ही नहीं तो आखिर आधार क्या है, बच्चों में खून की कमी का। लेकिन इन सवालों का डाक्टर राकेश गुप्ता के पास जवाब नहीं है। भास्कर ने जब डीजी नरेंद्र कुमार अरोड़ा से बातचीत की और पूछा कि कैसे पता चला बच्चों में खून की कमी है। क्या इस तरह का कोई सर्वे हुआ। उन्होंने कहा कि पता नहीं।उनसे जब पूछा गया कि आखिर कैसे हेल्थ विभाग ने बिना किसी जांच के बच्चों को दवा खाने को दी। जबकि यह तक पता नहीं किया कि उन्हें इसकी जरूरत है या नहीं। या उन पर दवा का साइड इफेक्ट नहीं होगा। इस सवालों का डीजी के पास जवाब नहीं था। और डीजी नहीं दे पाए सवालों के जवाब दवा को खाते ही बच्चों की तबीयत खराब हो रही है। यह केस एक दो स्कूल में नहीं बल्कि कई जिलों में हुआ। इसकी वजह क्या हो सकती है। जब भास्कर ने पड़ताल करनी शुरू की तो परत दर परत खुलासा होता चला गया। दवा क्यों, इस सवाल का स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह के पास भी नहीं था। अलबत्ता उन्होंने कहा कि हेल्थ डीजी से बात कर लें। ऐसे आया सच सामने दवा किस के कहने पर बांटी गई। इस सवाल का हेल्थ विभाग के डीजी नरेंद्र कुमार अरोड़ा के पास जवाब नहीं है। उनका जवाब है, केंद्र सरकार ने। लेकिन वहां कौन? बोले हेल्थ मंत्रालय। किस अधिकारी ने दिए आदेश। किस पत्र के तहत आदेश दिए गए। डीजी बोले नहीं यह जानकारी नहीं है। मिशन डायरेक्टर राकेश गुप्ता कहते हैं कि दवा केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई गई है। लेकिन वें भी यह साफ नहीं कर पाए कि आखिर किस के आदेश है, और क्यों इस तरह के आदेश दिए गए, जबकि यह पता ही नहीं इन बच्चों को दवा की जरूरत है भी या नहीं।

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