Wednesday, January 21, 2026

अनुकंपा आधार पर नौकरी नियोक्ता की ओर से रियायत, कोई कानूनी अधिकार नहीं : हाईकोर्ट


 पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि नियोक्ता की ओर से अनुकंपा आधार पर नियुक्ति कोई जन्मसिद्ध या वैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नौकरी कर्मचारी की सेवा के दौरान मौत के कारण परिवार पर आए वित्तीय संकट को कम करने के लिए दी जाने वाली रियायत है।


हाईकोर्ट ने विवाहित बेटी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने पिता की मृत्यु के करीब 20 वर्ष बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। याचिकाकर्ता के पिता पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में कार्यरत थे और 26 मार्च 2001 को उनका निधन हो गया था।

उस समय परिवार की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लगभग दो दशक बाद, 27 अक्तूबर 2022 को विवाहित

बेटी ने पीएसपीसीएल के समक्ष अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया जिसे कॉर्पोरेशन ने अस्वीकार कर दिया। पीएसपीसीएल ने अस्वीकृति के पीछे मुख्य कारण याचिकाकर्ता की वैवाहिक स्थिति, उसके पति की स्थिर सरकारी आय, चार अन्य भाई-बहनों की उपस्थिति और इस तथ्य को बताया कि वह अपनी विधवा मां से अलग पते पर रह रही है।


न्यायालय ने पूरे मामले का विस्तृत परीक्षण करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य किसी परिवार को पीढ़ियों तक सरकारी नौकरी का दावा देने का माध्यम बनाना नहीं है। यह केवल उस स्थिति में दी जाती है, जब कर्मचारी की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार के समक्ष जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाए।


हाईकोर्ट ने कहा कि पिता की मृत्यु के 20 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग करना अपने आप में इस बात का संकेत है कि परिवार उस समय ऐसे किसी तत्काल आर्थिक संकट से नहीं गुजर रहा था जिसके लिए यह असाधारण व्यवस्था बनाई गई है। अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की निर्भरता अपने दिवंगत पिता की आय पर सिद्ध नहीं होती। वह विवाहित है। उसका पति पर्याप्त सरकारी वेतन प्राप्त कर रहा है। परिवार में अन्य भाई-बहन मौजूद हैं और वह अपनी मां से अलग निवास कर रही हैं। इन परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति की आवश्यकता और औचित्य दोनों ही संदिग्ध प्रतीत होते हैं।

No comments:

Post a Comment