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Sunday, November 22, 2015

GAYATRI MANTA KE FAYDE:गायत्री मंत्र का जाप उससे मिलने वाले प्रभाव और स्वास्थ लाभ

गायत्री मंत्र का जाप उससे मिलने वाले प्रभाव और
स्वास्थ लाभ
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गायत्री मंत्र को सूर्य देव की उपासना के
लिए सबसे सरल और फलदायी मंत्र माना गया हैं। यह
मंत्र चारों वेदों से मिल कर बना है। यह मंत्र निरोगी
जीवन के साथ-साथ यश, प्रसिद्धि, धन व ऐश्वर्य देने
वाली होती है। लेकिन इस मंत्र के साथ
कई युक्तियां भी जुड़ी है।
गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में अनेक ज्ञान−विज्ञान
छिपे हुए हैं।

Saturday, July 25, 2015

A INSPIRING STORY WE MUST READ

ये कहानी में बहुत बड़ी सीख है 
शिव जी का तंत्र - एक दंत कथा
बहुत समय पहले की बात है एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढक रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था, सच मानो तो सभी राजा थे। दिन पर दिन अनुशासन हीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था। नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी। जो थोड़े बहुत होशियार मेंढक निकलते थे वे पढ़-लिखकर अपना तालाब सुधारने की बजाय दूसरे तालाबों में चैन से जा बसते थे।
हार कर कुछ बूढ़े मेंढकों ने घनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया और उनसे आग्रह किया कि तालाब के लिये कोई राजा भेज दें। जिससे उनके तालाब में सुख चैन स्थापित हो सके। शिव जी ने प्रसन्न होकर नंदी को उनकी देखभाल के लिये भेज दिया। नंदी तालाब के किनारे इधर उधर घूमता, पहरेदारी करता लेकिन न वह उनकी भाषा समझता था न उनकी आवश्यकताएँ। अलबत्ता उसके खुर से कुचलकर अक्सर कोई न कोई मेंढक मर जाता। समस्या दूर होने की बजाय और बढ़ गई थी। पहले तो केवल झगड़े झंझट होते थे लेकिन अब तो मौतें भी होने लगीं।
फिर से कुछ बूढ़े मेंढकों ने तपस्या से शिव जी को प्रसन्न किया और राजा को बदल देने की प्रार्थना की। शिव जी ने उनकी बात का सम्मान करते हुए नंदी को वापस बुला लिया और अपने गले के सर्प को राजा बनाकर भेज दिया। फिर क्या था वह पहरेदारी करते समय एक दो मेंढक चट कर जाता। मेंढक उसके भोजन जो थे। मेंढक बुरी तरह से परेशानी में घिर गए थे।

Wednesday, May 6, 2015

HARYANA ME SARASWATI NADI KI KHOJ HUI SAFAL

चंडीगढ़। जिस सरस्वती नदी की बरसों से तलाश चल रही है, वह हरियाणा के सात जिलों से होते हुए राजस्थान और गुजरात के रास्ते भारत-पाक सीमा के निकट अरब सागर में जाकर गिरती है। हरियाणा में सरस्वती नदी 275 किलोमीटर लंबी है। राजस्व रिकार्ड में इस नदी का जिक्र है। यमुनानगर के आदिबद्री से शुरू होकर यह नदी कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, फतेहाबाद और सिरसा को होते हुए राजस्थान में प्रवेश कर जाती है। सरस्वती राजस्थान के भी सात जिलों में बहती है और नागौर को होते हुए गुजरात में प्रवेश करती है। गुजरात के छह जिलों में बहती हुई सरस्वती नदी भारत-पाक सीमा पर फारस की खाड़ी में जाकर अरब सागर में समा जाती है। सरस्वती नदी शोध संस्थान के उप प्रधान भारत भूषण भारती के अनुसार ऋग्वेद में सरस्वती का जिक्र है। इस नदी के लिए अन्तफलील शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है कि धरती के नीचे चलने वाली नदी। इस नदी के पुनर्जन्म के लिए दो स्तर पर काम हुआ। पहले वेद-पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में सरस्वती नदी के बारे में तमाम तथ्य जुटाए गए। उसके बाद उदगम स्थल ढूंढने के लिए हरियाणा का राजस्व रिकार्ड खंगाला गया। भारती के अनुसार सरस्वती नदी का उदगम स्थल यमुनानगर जिले का

Saturday, April 11, 2015

हनुमान जी के ये 5 मंत्र करते हैं असंभव को संभव

1. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हनुमान जो को इष्ट मानने वाले भक्तों को रोजाना उनकी पूजा-उपासना और पाठ करना चाहिए। अगर किसी कारणवश उन्हें समय नहीं मिलता हो, तो हनुमान जी के एक मंत्र का जाप 11 बार करना चाहिए। यह मंत्र है "ऊं हनुमते नम:"। इस मंत्र के जाप से पाठ नहीं करने की कमी भी पूरी हो जाती है। साथ ही बिगड़े काम भी बनने लगते हैं।
2. हनुमान जी का साबर मंत्र एक ऎसा मंत्र है जो भक्त को सीधे उसकी पीड़ा उन तक पहुंचाता है और शीघ्र समाधान होता है। ध्यान रहे कि इस मंत्र का प्रयोग वही लोग करें जो खान-पान की अशुद्धता और अन्य बुराईयों से परे हों। हनुमान जी के शाबर मंत्र के कई प्रकार हैं जो अलग-अलग कार्यो के लिए हैं। इसलिए मंत्र और विधि-

Saturday, April 4, 2015

BELIEVE IN GOD

एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवो में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया। उसने अपने मंत्री को कहा कि, पता करो कि इस गाँव में कौन सा दर्जी हैं, जो मेरे बटन को सिल सके। मंत्री ने पता किया। उस गाँव में सिर्फ एक ही दर्जी था, जो कपडे सिलने का काम करता था। उसको राजा के सामने ले जाया गया। राजा ने कहा, क्य़ा तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो? दर्जी ने कहा, यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है। उसने मंत्री से बटन ले लिया। धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फोरन सी दिया, क्योंकि बटन भी राजा के पास था। सिर्फ उसको अपना धागे का प्रयोग करना था। राजा ने दर्जी से पूछा कि, कितने पैसे दू? उसने कहा, महाराज रहने दो, छोटा सा काम था। उसने मन में सोचा कि बटन भी राजा के

श्री हनुमान चालीसा " अर्थ सहित

हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं सब रटा रटाया | क्या हमे हनुमान चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से कया कह रहे हैं या कया मांग रहे हैं ?
बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो । तो लीजिए पेश है
" श्री हनुमान चालीसा " अर्थ सहित !!
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श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु,जो दायकु फल चारि।
《अर्थ》→ श्री गुरु महाराज ( हनुमान जी ) के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके

Tuesday, March 31, 2015

चाणक्य के 15 अमर वाक्य

चाणक्य के 15 अमर वाक्य
1)दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर
प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम
पड़ेगी।
2)किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार
नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष और व्यक्ति
पहले
काटे जाते हैं।
3)अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे
जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न दो
पर दंश
दे सकने

Tuesday, February 17, 2015

भगवान महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ


                                                ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ
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त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वाला (कर्मकारक)
यजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय
सुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधित (कर्मकारक)

Monday, November 10, 2014

JAI SHIVE BHOLE KI


भगवान शिव को ही लिंग रूप में क्यों पूजा जाता है
भगवान शिव ब्रह्मरूप होने के कारण निष्कल अर्थात निराकार हैं। उनका न कोई रूप है और न ही आकार वे निराकार हैं। आदि और अंत न होने से लिंग को शिव जी का निराकार रूप माना जाता है। जबकि शिव मूर्ति को उनका साकार रूप। केवल शिव ही निराकार लिंग के रूप में पूजे जाते हैं। इस रूप में समस्त ब्रह्मांड का पूजन हो जाता है क्योंकि वे ही समस्त जगत के मूल कारण माने गए हैं। शिव जी के निराकार होने के कारण ही उनका लिंग रूप में पूजन होता है अर्थात शिवलिंग शिव के निराकार रूप का प्रतीक है इसलिए मूर्ति और लिंग दोनों रूपों में पूजे जाते हैं। शिव के अतिरिक्त अन्य देवी-देवता ब्रह्म का स्वरूप नहीं माने गए हैं इसलिए उन्हें लिंग

Tuesday, July 15, 2014

श्री शक्ति एक्सप्रेस कराएगी माता के दर्शन

 नई दिल्ली (ब्यूरो)। माता वैष्णो देवी जाने के लिए अब आप सीधे कटरा तक ट्रेन से जा सकते हैं। सोमवार से माता वैष्णो देवी धाम के लिए नई दिल्ली से सीधे कटरा तक एसी एक्सप्रेस ट्रेन श्री शक्ति एक्सप्रेस (22461/22462) चलेगी। यह ट्रेन नई दिल्ली से रोजाना शाम साढ़े पांच बजे चलकर अगले दिन कटरा स्टेशन सुबह 5:10 पर पहुंचेगी। वापसी में यह कटरा से रात 10:55 पर चलकर अगले दिन नई दिल्ली स्टेशन पर सुबह 10:45 बजे पहुंचेगी। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने बताया कि ट्रेन वातानुकूलित होगी। इसमें एक कोच एसी फर्स्ट, दो एसी सेकंड और नौ कोच एसी थर्ड के होंगे। दोनों दिशाओं में यह अंबाला कैंट, लुधियाना, जालंधर कैंट, पठानकोट, जम्मू तवी और उधमपुर रेलवे स्टेशन पर रुकेगी। आज से चलेगी नई दिल्ली से कटरा के बीच सीधी ट्रेन 11 घंटे 40 मिनट में कटरा पहुंचेगी यह एसी ट्रेन श्री शक्ति का किराया •एसी फर्स्ट - 2385 रुपया •एसी सेकंड - 1410 रुपया •एसी थ्री - 1000 रुपया

Sunday, November 3, 2013

दीपावली गणेश लक्ष्मी की संपूर्ण पूजा विधि -2013

 दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन शुभ समय मुहूर्त्त समय पर ही किया जाना चाहिए. पूजा को सांयकाल अथवा अर्द्धरात्रि को अपने शहर व स्थान के मुहुर्त्त के अनुसार ही करना चाहिए. इस वर्ष 3 नवम्बर, 2013 को  रविवार के दिन दिवाली मनाई जाएगी.  स्वाती नक्षत्र का काल रहेगा, इस दिन प्रीति योग तथा चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है. 


3 नवम्बर 2013, रविवार के दिन 17:33 से लेकर 02 घण्टे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. इसे दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में उपयोग करते हैं. इस दिन पूजा स्थिर लग्न में करनी चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न दिवाली पूजा में उतम माना जाता है. इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न का समय सांय 18:15 से 20:09 तक रहेगा.  इसके पश्चात 18:00 से 21:00 तक शुभ चौघडिया भी रहने से मुहुर्त की शुभता बनी रहेगी.

लक्ष्मी पूजन सामग्री | Material For Lakshmi Worship

दीपावली: लक्ष्मी पूजन में ऐसे सजाएं पूजा की थाली

दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी पूजन पूरे विधि-विधान से किया जाना अति आवश्यक है। तभी देवी लक्ष्मी की कृपा तुरंत ही प्राप्त होती है। पूजन के समय सबसे जरूरी है कि पूजा की थाली शास्त्रों के अनुसार सजाई जाए।पूजा की थाली के संबंध में शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मी पूजन में तीन थालियां सजानी चाहिए।


  • पहली थाली में 11 दीपक समान दूरी पर रखें कर सजाएं।
  • दूसरी थाली में पूजन सामग्री इस क्रम से सजाएं- सबसे

HAPPY DIPAWALI TO ALL





Wednesday, October 2, 2013

Sangmeshwar Dham Arunai Pehowa(Haryana)

शि' का अर्थ है पापों का नाश करने वाला और 'व' कहते हैं मुक्ति देने वाले को। भोलेनाथ में ये दोनों गुण हैं इसलिए वे शिव कहलाते हैं। शिव भक्तों का सर्वाधिक लोक प्रिय मंत्र है "ॐ नमः शिवाय"। नमः शिवाय अर्थात शिव जी को नमस्कार पाँच अक्षर का मंत्र है "न", "म", "शि", "व" और "य" । प्रस्तुत मंत्र इन्ही पाँच अक्षरों की व्याख्या करता है। स्तोत्र के पाँच छंद पाँच अक्षरों की व्याख्या करते हैं। अतः यह स्तोत्र पंचाक्षर स्तोत्र कहलाता है। "ॐ" के प्रयोग से यह मंत्र छः अक्षर का हो जाता है। ॐ नमः शिवाय