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Tuesday, April 14, 2015

प्रेरणादायक कथा :पिज्जा

प्रेरणादायक कथा ::
---------------------पिज्जा------------------------
पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…

पति- क्यों??

उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…

पति- क्यों??

पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…

पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…

पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..

पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…

पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस

Monday, April 13, 2015

Happy Garmi

कमबल और रजाई को
अब कर दो माफ,
कूलर और ए.सी.को
अब कर लो साफ,
पसीना छूटेगा अब
दिन और रात,
दोनों वक्त नहाने से ही अब
बनेगी बात,
अपनी Nature में भी
रखना नरमी,
मेरी तरफ से आप सभी को
'Happy Garmi'

Thursday, April 9, 2015

A LINE FROM FB

बड़ा इतराते फिरते थे वह अपनें हुस्न-ए-रुखसार पर...
*मायूस बैठे हैं जबसे देखी हैं अपनी तस्वीर कार्ड- ए- आधार पर

Saturday, April 4, 2015

BELIEVE IN GOD

एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवो में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया। उसने अपने मंत्री को कहा कि, पता करो कि इस गाँव में कौन सा दर्जी हैं, जो मेरे बटन को सिल सके। मंत्री ने पता किया। उस गाँव में सिर्फ एक ही दर्जी था, जो कपडे सिलने का काम करता था। उसको राजा के सामने ले जाया गया। राजा ने कहा, क्य़ा तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो? दर्जी ने कहा, यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है। उसने मंत्री से बटन ले लिया। धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फोरन सी दिया, क्योंकि बटन भी राजा के पास था। सिर्फ उसको अपना धागे का प्रयोग करना था। राजा ने दर्जी से पूछा कि, कितने पैसे दू? उसने कहा, महाराज रहने दो, छोटा सा काम था। उसने मन में सोचा कि बटन भी राजा के

HALMET HAI JARUURI:EK PAHAL

अगर सरकार ने हैलमेट अभियान सुरु किया है तो उसमे थोड़ा सा सुधार करे। जैसे किसी व्यक्ति के पास हैलमेट नहीं है तो ट्रैफिक पुलिस . उसका चालान करती है उसके बजाय ट्रैफिक पुलिस वाले उस व्यक्ति को उसी समय हैलमेट दे और हैलमेट के पैसे ले। उससे उसके पास हैलमेट भी हो जायेगा अगर उसे दूसरी बार फिर बिना हैलमेट पकड़ा गया तब फिर से उसे हैलमेट दे इससे वह व्यक्ति हैलमेट लगाने के लिये मजबूर हो जाएगा और भ्रष्टाचार कम होगा। इस मैसेज को आगे बढ़ाते रहो की ये सरकार तक पहुचे और इस पर सरकार कोई न कोई कदम उठाये आपका थोड़ा सा साथ इस अभियान मे एक छोटी सी पहल होगी || "शुरुआत" एक कदम बदलाव की ओर.

KUCH KAAM KI BAATEN

*अच्छे व्यक्ति के साथ मित्रता उस गन्ने की तरह होती हे, जिसे आप कितना ही तोड़ो, दबाओ, चूसो यहाँ तक की पीस ही डालो, हर बार सिर्फ और सिर्फ मिठास ही निकलेगी

FB SE LIYA HUA
गोल गप्पे की दुकान पर लगा बोर्ड
राजू गोल गप्पे वाला...
.
रेट - 10/- के 6 गोल गप्पे
.

AAJ KE YUG KI SACCHI KAHANI:लकड़हारा

**लकड़हारा**
एक बार लकड़ी काटने में माहिर एक आदमी
लकड़ी के बड़े व्यापारी के यहाँ काम की
तलाश में गया। उसे लकड़ी काटने की
नौकरी मिल गयी।
_______
तनख्वाह तो अच्छी थी लेकिन काम भी
उसी तरह कठिन था। इस वजह से उसने खूब
मेहनत से काम करने का निश्चय किया।
उसके बॉस ने उसे एक कुल्हाड़ी दिया और
कार्यस्थल भी दिखा दिया। पहले ही

Wednesday, April 1, 2015

जो भी होगा भले के लिये होगा



एक आदमी की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नि के साथ वापिस आ रहे थे!

रास्ते में वो दोनों एक बडी झील को नाव के द्वारा पार कर रहेथे,

तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया !

वो आदमी वीर था लेकिन औरत बहुत डरी हुई थी क्योंकि हालात बिल्कुल खराब थे!

नाव बहुत छोटी थी और तूफ़ान वास्तव में भयंकर था और दोनों किसी भी समय डूब सकते थे!

लेकिन वो आदमी चुपचाप, निश्चल और शान्त बैठा था जैसे कि कुछ नहीं होने वाला हो!

औरत डर के मारे कांप रही थी और वो बोली "क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा"

ये हमारे जीवन का आखरी क्षण

Tuesday, March 31, 2015

शिक्षकों से जुड़ी धारणा और हकीकत

अनुराग बेहर, सीईओ, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन
सरकारी शिक्षकों के बारे में देश में एक मिथ है कि उनमें से ज्यादातर स्कूलों से गायब रहते हैं। पर सच्चाई कुछ और है। असर 2014 के आकलन के मुताबिक, 15 प्रतिशत शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। और इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो बाकायदा छुट्टी मंजूर कराकर गए या जिन्हें अन्य सरकारी कामों से बाहर जाना पड़ा। बगैर मंजूरी के गैर-हाजिर शिक्षक करीब छह-आठ प्रतिशत हैं। फिर भी लोगों के जेहन में शिक्षकों के स्कूल से गायब रहने का मिथ कायम है। अधिकतर लोगों के मुताबिक, पहला सुधार-कार्य प्रशासनिक सुधार का होना की जागरूकता के कारण भी शिक्षकों का लंबे समय तक गायब रहना मुश्किल है। असल में, गैर-हाजिरी अपनी गहरी सामाजिक-राजनीतिक जड़ों के साथ पूरे तंत्र का रोग है। हमें चीजें सुधारनी चाहिए, पर सिर्फ स्कूलों के संदर्भ में नहीं। वैसे, शिक्षा तंत्र में सुधार के लिए हमें कुछ जरूरी उपाय करने चाहिए। सबसे पहले हम शैक्षणिक सुशासन की प्राथमिकताओं की सूची