एलिजिबिलिटी
एमबीबीएस उत्तीर्ण छात्र। जिस विषय के लिए एग्जाम दे, उसके क्राइटेरिया के हिसाब से संबंधित विषयों में एमडी/एमएस/डीएनबी किया हो।
कई बार बदला नाम केजीएमसी का
1911 में इस इंस्टीट्यूट से पहली बैच पास आउट हुई, तब इसका नाम किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज था। २००२ में मायावती के शासनकाल में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया और साथ ही छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी नाम दिया गया। एक साल बाद ही मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इसे फिर केजीएमयू नाम दिया। 2007 में मायावती ने फिर इसका नाम बदल कर छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी किया गया। लेकिन फिर से इसे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का नाम दिया गया।
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