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Tuesday, August 4, 2026

निजी विश्वविद्यालयों से PhD करने वाले कॉलेज प्रोफेसरों के CAS लाभ से वंचित नहीं रख सकते

 यह कॉलेज प्रोफेसरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।


अब कॉलेज प्रोफेसरों के CAS (Career Advancement Scheme) के लाभ केवल इस आधार पर नहीं रोके जा सकते कि उन्होंने किसी निजी (Private) विश्वविद्यालय से PhD की डिग्री प्राप्त की है, यदि उन्होंने कॉलेज सेवा में नियुक्ति से पहले अपनी PhD पूरी की थी।


इससे पहले मंजू बाला मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने उच्च शिक्षा निदेशक को मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए थे, जिसके चलते निजी विश्वविद्यालयों से PhD करने वाले कई कॉलेज प्रोफेसरों के CAS लाभ लंबित रखे गए थे।


अब माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने कॉलेज सेवा में आने से पहले PhD की डिग्री प्राप्त की है, तो केवल इस आधार पर उसके CAS लाभ नहीं रोके जा सकते।



Saturday, February 1, 2014

PHD DHARAK HUE PRESHAN

प्रदेश के पीएचडीधारक प्रदेश सरकार से खफा हैं। खफा सरकार के नए फैसले को लेकर हैं। दरअसल सरकार ने कॉलेजों में 1400 सहायक प्रोफेसर की भर्ती निकाली गई है, लेकिन प्रदेश सरकार ने इन पदों के लिए केवल नेट पास करने वालों को योग्य माना है। इन पदों के लिए पीएचडीधारकों को अयोग्य माना गया है। हरियाणा के कॉलेजों में एक हजार चार सौ सहायक प्रोफेसरों की भर्ती होने जा रही है। लेकिन प्रदेश सरकार के नए फैसले के मुताबिक इन पदों के लिए वही लोग आवेदन कर सकेंगे जो नेट पास कर चुके हैं। सरकार ने इन पदों के लिए पीएचडी को अयोग्य माना है। सरकार के इस फैसले को लेकर पीएचडीधारकों में काफी नाराजगी है। कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी के पीएचडीधारकों का कहना है कि पीएचडी किसी भी मायने में नेट से कम नहीं है। कुरुक्षेत्र विशवविधालय का शिक्षक संघ भी पीएचडी डिग्री धारकों के समर्थन में आ गया है। शिक्षक संघ ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। बहरहाल सरकार के फैसले से प्रदेश भर के पीएचडीधारक खफा हैं। सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार अपना फैसला वापस लेगी।