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Friday, September 19, 2014

THOUGHT OF THE DAY:19 SEPTEMBER 2014

जरुरत के मुताबिक जिंदगी जीओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं ! क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है; पर ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती हैं ! बचपन की वोह अमीरी न जाने कहाँ खो गई ......वरना बारिश के पानी में हमारे कई जहाज चला करते थे ।

Monday, August 4, 2014

THOUGHT OF THE DAY DATED 04.08.14

अभी से क्यूँ बताये लोगो को हम क्या है ,
उपलब्धिया खुद बोलेगी हम में दम क्या है ;
किसी की क्या मज़ाल बहते पानी को रोके ,
कछुआ जानता है खरगोश को भ्रम क्या है .

Tuesday, July 29, 2014

A BEAUTIFUL POEM BY HARIVANSH RAI BACCHAN

यहाँ सब कुछ बिकता है , दोस्तों रहना जरा संभाल के !!!बेचने वाले हवा 

भी बेच देते है , गुब्बारों में डाल के !!!सच बिकता है ,

 झूट बिकता है, बिकती है हर कहानी !!!तीन लोक में फेला है , फिर भी

 बिकता है बोतल में पानी!!!कभी फूलों की तरह मत जीना,जिस दिन 


खिलोगे... टूट कर बिखर्र जाओगे ।जीना है तो पत्थर की तरह 

जियो;जिस दिन तराशे गए... "खुदा" बन जाओगे ।।--हरिवंशराय बच्चन

Friday, June 20, 2014

YE HAI SABKE LIYE JIVAN KI VARNMALA


THOUGHT OF THE DAY DATED 20.06.14

सबर कर बन्दे मुसीबत के दिन भी गुजर जायेंगे !!

हंसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे !!

Monday, June 9, 2014

THOUGHT OF THE DAY:A STORY FROM FB

दोस्तों इस कहानी को मिस मत करना plzेreadएक बार एक महिला की car ख़राब हो गयी. उसेसूझ नहीं रहा था की क्या करें. वो बहुतही देर तक वहाँ वेटकरती रही की कोई आकरउसकी मदद कर दे. तभी वहाँ से एकआदमी जा रहा था. वो बहुत ही गरीबलग रहा था और भूखा भी. वो अपनी साइकिल सेउतरा और उस महिला की और बढ़ा.महिला बूढी थी. उसे डर लगरहा था की कही ये आदमी उसेनुकसान पहुंचाने तो नहीं आ रहा है.तभी वो आदमी उसकी Mercedesगाड़ी के आगे खड़े हो गया. वो धीरे सेबोला की मैडम आप क्यों नहीं गाड़ी मेंबैठ जाती है. बाहर बहुत ठण्ड है. तबतक मैंआपकी गाड़ी को देख लेता हूँ. और मेरा नाम BryanAnderson हैं.महिला को थोड़ी शांति मिली. आदमी नेदेखा की गाड़ी का केवल टायर पंक्चर हो गया हैं.पर उस बूढी महिला के लिए तो येभी बड़ी problem थी.उसने tyre बदलने का कार्य शुरू कर दिया. और कुछही देर मेंनया टायर भी लगा दिया. अब बस उसके nut-boltकसने थे.तभी महिला ने खिड़की से बहार झाँका औरकहा की “मुझे अगले शहर जाना है. यहाँ से बस गुज़ररही थी. तभी गाड़ी ख़राबहो गयी.”उसने Bryan का बहुत ही धन्यवाद किया. उसेपता था की अगर वो नहीं आता तो उसेकितनी ही मुश्किलों का सामना करनापड़ता.जल्द ही उसने टायर बदल दिया. महिलाने उससे पूछा“तुम्हारे कितने पैसे हुए बेटा?” वो इस समय Bryanजो मांगता उसे देने केलिए तैयार थी. क्योकि उसने पहलेही सारी डरावनी घटनाओं के बारे में सोचलिया था जो हो सकती थी. पर Bryanकी मदद से ऐसा कुछ नहीं हुआ.वो उसकी आभारी थी.पर Bryan ने ऐसा कुछ नहीं सोचा था. वो तो बसउसकी मदद करने आया था.उसे याद था की जिंदगी मेंकितनी ही बार लोगों ने उसकी मददकी थी. औरउसकी जिंदगी अभी तक ऐसेही चलती आई थी. निस्वार्थ मददलेकर और मदद देकर. उसने पैसो के बारे मेंकभी सोचा भी नहीं था. चाहे उसेइनकी कितनी भी जरुरत क्यों न हो.उसने कहा ” मुझे आपके पैसे नहीं चाहिए मैडम, परअगरआपको अगली बार ऐसा कोई व्यक्ति दिखे जिसेआपकी सहायता की जरुरत हो. तो उस समयकभी पीछे मत हटीयेगा. तब आप मुझेयाद करके मदद कर देना. जिंदगी ही आखिर सहयोगपर टिकी हैं.”ये कहकर वो चला गया. और महिला भी अपने सफ़रपर चलदी. रास्ते भरवो यही सोचती रही की ऐभी लोग होते है जो निस्वार्थ भाव से अनजानेलोगों की मदद कर जाते हैं.थोड़ी रात को वो एक पेट्रोल पंप केपास से गुजरी.पास ही में एक होटल भी था. उसनेसोचा की कुछ खाने के बाद बाकि का सफ़र तयकिया जाए.बाहर

Friday, May 30, 2014

जो है उसमे खुश रहना सीखें:TODAYS STORY

दोस्तों के लिए एक कहानी
कनाडा के टोरंटो में दो मित्रों को अजीब विचार सूझा. उन्होंने तीन बकरियों को पकड़ा और तीन तरफ 1, 2, और 4 नंबर लिख दिए. उन्होंने उन बकरियों को अपने स्कूल की बिल्डिंग में उस रात खुला छोड़ दिया. अगली सुबह जब प्राधिकारी स्कूल में आए, तो उन्हें कुछ बदबू सी आई. जल्दी ही उन्हें सीढ़ियों और प्रवेश द्वार के पास बकरियों की लीद दिखाई दे गई और उन्हें समझ आ गया कि कुछ बकरियां बिल्डिंग के अदंर आ गई हैं. तुरंत ही हर जगह खोज शुरू कर दी गई. जल्द ही उन्हें तीनों बकरियां मिल गई. पर प्राधिकारी इस बात से चिंतित हो उठे कि आखिर बकरी नंबर 3 कहां है. उन्होंने बाकी बचा दिन 3